Meri raftaar badha di gayi hai Dil se ik yaad bhula di gayi hai Kisi ghaflat ki saza di gayi hai Maine manzil ki dua maangi thi Meri raftaar badha di gayi hai Aib deewar ke honge zahir Meri tasveer hata di gayi hai Main ne ik dil pe hukoomat kya ki Mujhe talwar thama di gayi hai Ab moha…
Read moreकितना मुश्किल है अज़ीयत ये गवारा करना कितना मुश्किल है अज़ीयत ये गवारा करना, दिल से उतरे हुए लोगों में गुज़ारा करना ज़िन्दगी हम पे ये आसां भी हो सकती थी, सीख लेते जो किसी दर्द का चारा बनाना.! कहां जाते हो अभी साथ गुजारो कुछ दिन, हम पे मुश्किल कोई आये तो किनारा करना.! कितना मुश्किल है जल…
Read moreबहार रुत में उजड़े रस्ते, तका करोगे तो रो पड़ोगे किसी से मिलने को जब भी मोहसिन, सजा करोगे तो रो पड़ोगे तुम्हारे वादों ने यार मुझको, तबाह किया है कुछ इस तरह से कि जिंदगी में जो फिर किसी से, दगा करोगे तो रो पड़ोगे… मैं जानता हूँ मेरी मुहब्बत, उजाड़ देगी तुम्हें भी ऐसे कि चाँद रातों मे अब कि…
Read moreChhodiye, ab wo kissa purana hua Ab to Amjad judaai ke us mod tak dard ki dhundh hai aur kuch bhi nahi Janeman, ab wo dil lautne ke nahi Chhodiye ab wo kissa purana hua. Wo jo uljha tha vahshi hawa se kabhi Us diye ko bujhe to zamana hua Chhodiye, ab wo kissa purana hua. छोड़िए, अब वो …
Read moreकभी-कभी यूँ भी होता है कि इंसान बहुत कुछ चाहकर भी कम ही हासिल कर पाता है। दिन बीतते जाते हैं, मगर कदम वहीं के वहीं ठहर जाते हैं। सपने धुएँ की तरह उँगलियों से फिसलते रहते हैं और जीवन, बिना किसी शोर के, आधा से ज़्यादा गुज़र चुका होता है। यही एहसास—अधूरेपन, ठहराव और गुज़रते लम्हों की ख़ामोश…
Read moreदश्त में प्यास बुझाते हुए मर जाते हैं दश्त में प्यास बुझाते हुए मर जाते हैं हम परिंदे कहीं जाते हुए मर जाते हैं हम हैं सूखे हुए तालाब पे बैठे हुए हँस जो तअ'ल्लुक़ को निभाते हुए मर जाते हैं घर पहुँचता है कोई और हमारे जैसा हम तिरे शहर से जाते हुए मर जाते हैं किस तरह लोग चले जाते हैं उ…
Read moreKhirad ki gutthiyan suljha chuka mai, Aai mere Maula mujhe sahib-e-Junoon kar. -Allama Iqbal
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